पटना में छठा राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन शुरू: ज्ञान भवन में जुटे 52 देश से आए प्रतिनिधि, …जानिए

छठे राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन का आयोजन बिहार में हो रहा है। इस सम्मेलन में 52 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। शनिवार सुबह पटना के ज्ञान भवन में सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की कार्यकारिणी समिति की अध्यक्ष एमीलिया एम लिफाफा, लोकसभा की प्राक्कलन समिति के सभापति डा. मुरली मनोहर जोशी एवं अन्य गणमान्य शामिल हुए।

विधायिका व न्यायपालिका में टकराव टालने के उपाय ढूंढेंगे
छठा राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन 2030 तक दुनिया की खुशहाली के एजेंडे को अंजाम देने में अपनी भूमिका तय करेगा। यह, इस आयोजन का खास टास्क है। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी का नया खाका भी खींचा जाएगा। संसदीय दिग्गज विधायिका व न्यायपालिका में संतुलन के तरीके पर भी बात करेंगे।

चर्चा का एक विषय, ‘विकास के एजेंडे में संसद की भूमिका’ के संबंध में है। विकास की धारणा में प्रत्येक व्यक्ति के लिए सम्मानजनक जीवन, स्वतंत्रता का अधिकार, समानता और जीवनयापन की बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था को जोड़ा गया है। इस पर भी चर्चा होगी कि कैसे 2030 तक गरीबी को समाप्त कर, दुनिया में सबके लिए खुशहाली सुनिश्चित की जाए।

सितम्बर 2015 में दुनिया के देशों ने मिलकर 2030 का यह लक्ष्य तय किया है। सम्मेलन का दूसरा विषय है- ‘विधायिका और न्यायपालिका : लोकतंत्र के दो महत्वपूर्ण स्तंभ।’ इन दोनों संस्थाओं में संतुलन के तरीके पर चर्चा होगी।

तीन दिवसीय सम्मेलन में लोकसभा की प्राक्कलन समिति के सभापति डा. मुरली मनोहर जोशी, विधि एवं न्याय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद दो पूर्ण सत्रों को संबोधित करेंगे। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की कार्यकारिणी समिति की अध्यक्ष एमीलिया एम लिफाफा भी प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगी। वहीं राज्यपाल सत्यपाल मलिक 18 फरवरी को समापन सत्र को संबोधित करेंगे।

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