बड़ी खुशखबरी: राज्य कर्मियों को केंद्रीय कर्मियों के अनुरूप 2006 से मिलेगा वेतन, …जानिए

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में 8 ऐजेंडों पर मुहर लगी। कैबिनेट में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले इस प्रकार हैं।

इस बैठक में राज्य वेतन आयोग की अनुशंसा को स्वीकृत करते हुए केंद्रीय कर्मियों के तर्ज पर राज्य कर्मियों को भी एक जनवरी 2006 से अपुनरीक्षित वेतनमान (अनरिवाइज्ड पे-स्केल) में एक समान वेतन वृद्धि का लाभ दिया जायेगा। यह लाभ उन्हीं कर्मियों को मिलेगा, जिन्हें फरवरी से जून 2006 के बीच वेतन वृद्धि या एमएसीपी मिलने वाली थी।

इसके अलावा राज्य में कॉलेज शिक्षकों की बहाली के लिए तैयार की गयी बिहार राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2017 को मंजूरी दे दी गयी है। विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक में नये संशोधन के अनुसार, सभी विश्वविद्यालयों में एक चयन समिति बनाने का प्रावधान किया गया है।

इसका मुख्य कार्य राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में एफिलिएटेड (संबद्ध) कॉलेजों में वर्ष 2007 तक या इससे पहले नियुक्त हुए सभी तरह के शिक्षकों के नियुक्ति की जांच की जायेगी। यह जांच यही समिति करेगी। यह चयन समिति सरकारी कॉलेजों के सभी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और इससे जुड़े तमाम पहलुओं की गहन जांच करेगी। जिनकी नियुक्ति गलत तरीके से हुई है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले :-
वाणिज्यकर विभाग के कार्यालयों में वर्ष 1979-80 और 81 में प्रमंडलीय वाणिज्यकर संयुक्त आयुक्तों के स्तर से वर्ग 3 और 4 के पद पर अनियमित रूप से नियुक्त किये गये 351 कर्मियों में 46 कर्मियों की सेवा नियमित की गयी।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अंतर्गत क्षेत्रीय स्तर पर जिला चयन समिति की तरफ से विज्ञापन निकाल कर भर्ती किये जाने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों को मानदेय बेल्ट्रॉन की तरफ से तय मानदेय के अनुरूप दिया जायेगा। इनकी सेवा शर्त भी बेल्ट्रॉन की तरफ से तय नियमों के अनुरूप होगी।

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दरभंगा के बिरौल को नगर परिषद बनाने का फैसला लिया गया और बिहार राज्य जल और वाहित मल बोर्ड बोर्ड अधिनियम, 1982 को समाप्त कर दिया गया है।

बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक, 2017 के प्रारूप को भी मंजूरी दी गयी। इसमें चिकित्सकों की सेवा शर्तों से जुड़े नियमों को अंतिम रूप दिया गया है। इसी तरह पीएमसीएच में मौजूद बिहार राज्य ब्लड बैंक के मौजूदा सात पदों को समायोजित करते हुए 14 नये पदों के सृजन को स्वीकृति दी गयी है। वर्तमान में मौजूद सभी सात पदों को अनुपयोगी माना जा रहा है, इसलिए इनके प्रारूप को बदलते हुए नये पदों का सृजन किया गया है।

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