पटना जू से ऑनलाइन जुड़ेंगे 110 देशों के 1000 जू, …जानिए

2018 के अंत तक पटना जू से विश्व के 110 देशों के 1000 जू पूरी तरह ऑनलाइन जुड़ जायेंगे। जिम्स (जूलॉजिकल इंफार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत यह संभव होगा। इसके लिए लंबे समय से जू के जीव जंतुओं का डिजिटल रिकार्ड बनाया जा रहा था, जो अब पूरा होने के कगार पर हैं। इसमें जू में आने से पहले के विवरण और आने के बाद जानवर की पूरी दिनचर्या, खान-पान, चिकित्सा आदि का विवरण शामिल हैं। आंकड़ों के पूरी तरह ऑनलाइन हो जाने के बाद हर जू दूसरों के अनुभव का लाभ उठा पायेगा, जिससे जानवरों के फीडिंग, चिकित्सा और पेड़ पौधों के संवर्धन में सुविधा होगी।

लंबे प्रयास के बाद मिली सफलता
दुनिया के विकसित देशों के तर्ज पर पटना जू को जिम्स से जोड़ने की योजना सबसे पहले वर्ष 2009 में बनी। लेकिन डिजिटल डेटा की कमी इसकी राह में सबसे बड़ी बाधक थी। गैंडा और बाघ-शेर जैसे चुनींदे जानवरों का डिजिटल रेकार्ड बना कर प्रायोगिक तौर पर इसके इस्तेमाल का प्रयास भी हुआ। लेकिन बहुसंख्यक कर्मियों के डिजिटल फ्रेंडली नहीं होने के कारण व्यवहार में इसे लाना संभव नहीं हुआ। बीते समय में कई दौड़ के प्रयासों के बाद अब पटना जू को अपने सभी जीव जंतुओं का डिजिटल विवरण संग्रहीत करने में सफलता मिली है।

एक क्लिक से आ जायेगी पूरी जानकारी
पूरी तरह ऑनलाइन होने के लिए पटना जू अब जीव जंतुओं से संबंधित अपने पुराने रिकार्ड को भी डिजिटल कर रही है। इसमें छह से आठ महीना लगने की उम्मीद है। इसके बाद सारे रिकार्ड को आॅनलाइन कर दिया जायेगा और पटना जू विश्व के अन्य बड़े और विकसित जू के साथ पूरी तरह जुड़ जायेगा। जिम्स पर पूरी जानकारी आते ही इससे जुड़ा कोई भी व्यक्ति महज एक क्लिक में पटना जू के किसी भी जीवजंतु की स्थिति और उससे जुड़ी सूचनाओं को तत्क्षण प्राप्त कर सकेगा। इससे सेंट्रल जू ऑथिरिटी और देश के 32 अन्य बड़े जू के अधिकारी कभी भी पटना जू के किसी भी जीव-जंतु की स्थिति जान पायेंगे।

पढ़े :   नीतीश कैबिनेट का बड़ा फैसला: धान खरीद के लिए 2500 करोड़ रुपये मंजूर

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया, इंडियन वेटनरी इंस्टीच्यूट और लेबोरेट्री फॉर कन्जर्वेशन ऑफ इन्डेंजर्ड स्पेसीज जैसी वन्य प्राणी और उनके संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही देश की कई अग्रणी संस्थान भी जिम्स से जुड़े हुए हैं जो न केवल पटना जू के जीव जंतुओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर पायेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी मॉनिटरिंग भी कर पायेंगे। विश्व के 110 देशों के 1000 जू को भी ऐसी ही सुविधा प्राप्त होगी।

जिम्स पर मिलेंगी ये सूचनाएं
स्टार्ड बुक- इसमें जानवरों की उत्पत्ति और उसके माता और पिता दोनों तरफ के ब्लड लाइन का विवरण होगा। जानवरोंं की क्षमता और उनकी प्रतिरोधक शक्ति के आकलन में इनका विशेष महत्व होता है।
हिस्टरी कार्ड- इसमें जानवर के जू में लाये जाने से पहले के उनके जीवन का विवरण होता है।
फूड लॉग- इसमें जानवर के खान पान के समय, अलग अलग मौसम में उसकी मात्रा आदि का विवरण होता है। इससे अन्य जू को किसी खास प्रजाति के जानवर की खुराक निर्धारित करने में सुविधा होती है।
ट्रिटमेंट कार्ड- जानवरों के ब्रीडिंग, बीमारी और चिकित्सा का इसमें विवरण होता है। विशेष मामलों में किस दवा का इलाज के दौरान कैसा असर रहा, इसका भी विवरण होता है। इससे अन्य जू को भी जानवरों के बीमार पड़ने पर उनके चिकित्सा में सहायता मिलती है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!