बदलने वाली है बिहार के 13 जिलों की सूरत, …देखें लिस्ट

बिहार के 13 जिलों की सूरत बदलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक ‘न्यू इंडिया’ बनाने का नारा दिया है। इसी नारे को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने अगले पांच साल में देश के सर्वाधिक पिछड़े 115 जिलों के कायापलट का बीड़ा उठाया है। ये जिले शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे मानव विकास के पैमाने पर तो पिछड़े हैं हीं, यहां बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।

बिहार से जिन 13 जिलों को चुना गया है उसमें खगड़िया, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, सीतामढ़ी, शेखपुरा, मुजफ्फरपुर, नवादा, औरंगाबाद, गया, बांका, जमुई शामिल हैं। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि देश के मानव विकास सूचकांक में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए इन जिलों की स्थिति में सुधार लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में विकास कार्यों की निगरानी सबसे अहम होगी। इस संबंध में उन्होंने आंध्र प्रदेश का अनुसरण करने की सलाह दी जिसके साथ निगरानी के लिए नीति आयोग ने हाल में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

गृह सचिव राजीव गाबा ने भी कहा कि अगर इन जिलों की स्थिति में बदलाव आ गया तो इससे देश के सुरक्षा माहौल पर भी काफी फर्क पड़ेगा क्योंकि पिछड़े जिलों में करीब चार दर्जन जिले वामपंथी अतिवादी ¨हसा और आतंकवाद की समस्या से प्रभावित हैं।

इस पूरी योजना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्रलयों में तैनात अतिरिक्त और संयुक्त सचिव स्तर के 115 अधिकारियों को प्रत्येक पिछड़े जिले का ‘प्रभारी अधिकारी’ बनाया है। ये अधिकारी राज्यों के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे और ‘डिस्टिक्ट एक्शन प्लान’ को तैयार करके अमल में लाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा ने शुक्रवार को इन प्रभारी अधिकारियों की पहली बैठक बुलाई। उन्होंने प्रभारी अधिकारियों को तत्काल राज्यों के अधिकारियों के साथ इन जिलों की स्थिति बेहतर बनाने के लिए टीम बनाने को कहा।

बताते चलें कि इनमें से करीब चार दर्जन जिले वामपंथी अतिवादी ¨हसा और आतंकवाद के शिकार हैं। यही वजह है कि सरकार ने इनका हाल बदलने के लिए हर पिछड़े जिले के लिए एक ‘डिस्टिक्ट एक्शन प्लान’ बनाने का निश्चय किया है।

सर्वाधिक पिछड़े इन 115 जिलों में सबसे अधिक 19 जिले झारखंड, 13 जिले बिहार, 10 जिले छत्तीसगढ़, आठ जिले उत्तर प्रदेश और पांच जिले पश्चिम बंगाल के शामिल हैं। इन्हीं जिलों के लिए अगले पांच साल के लिए ‘डिस्टिक्ट एक्शन प्लान’ बनेगा और इसमें सामाजिक- आर्थिक विकास के अलग-अलग पैमाने पर समयबद्ध लक्ष्य तय किए जाएंगे। खास बात यह है कि इसमें नौकरियों के सृजन का रोडमैप दिया जाएगा ताकि इन जिलों में बेरोजगारी की समस्या का मुकाबला किया जा सके।

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