डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेंगे बिहार के 849 थाने

क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) पुलिसिंग व कानून व्यवस्था में सुधार की बड़ी कोशिश है। बिहार सरकार/पुलिस ने इसके कार्यान्वयन के वास्ते टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस से एक करारनामा किया है। इसके तहत लोगों को 7 तरह की सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी।

शिकायत दर्ज, चरित्र सत्यापन, आवश्यक पुलिस अनुमति, खोए-पाए-लापता सामग्रियों की सूचना, खोए या चोरी हुए सामानों की जानकारी आदि भी ऑनलाइन मिलेगी। अपराधियों के फिंगरप्रिंट का डेटाबेस होगा। कहीं के भी अपराधी की जानकारी उसके फिंगरप्रिंट से हो सकेगी।

फिंगरप्रिंट डेटाबेस से सिर्फ 89 सेकंड में अपराधी की पहचान हो सकेगी। थानों में गुंडा रजिस्टर, एफआईआर रिकॉर्ड आदि भी डिजिटल होंगे। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी एक थाना से दूसरे थाना में सूचना के आदान प्रदान में बहुत सुविधा व पारदर्शिता होगी। इससे पुलिस डायरी में हेरफेर करना मुश्किल होगा।

पटना और नालंदा में 32 हफ्ते में एक्टिव होगा
इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पटना व नालंदा जिला में शुरू किया जाना है। यहां यह 32 सप्ताह के अंदर एक्टिव होगा। इसके बाद अगले 23 सप्ताह में इसे राज्य के अन्य पुलिस कार्यालयों में लागू किया जाएगा। यह एक साल में पूरे राज्य में काम करने लगेगा।

राज्य पुलिस मुख्यालय से जुड़ेंगे सभी थाने, खर्च होंगे 250 करोड़ रुपए
स्थानीय पुलिस स्टेशन और जिला पुलिस मुख्यालय, राज्य पुलिस मुख्यालय से जुड़ेंगे। ये सभी स्टेट क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो और राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो से जुड़ेगा। इस सिस्टम पर 250 करोड़ खर्च होगा। 206 करोड़ बिहार सरकार देगी, बाकी केंद्र सरकार। 1326 कार्यालयों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसमें 894 पुलिस स्टेशन के अलावा 380 उच्चाधिकारियों के भी कार्यालय हैं।

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जांच और सेवा की कार्यप्रणाली में आएगी पारदर्शिता
मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पुलिस थाना द्वारा वरीय अधिकारियों को घटना के तुरंत बाद अपराध व अपराधियों के बारे में जानकारी देना, जांच व सेवा की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है। वरिष्ठ अधिकारियों को त्वरित निर्णय लेने के लिए सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

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