पनडुब्बी ‘खांदेरी’ भारतीय नौसेना में शामिल, टॉरपीडो के साथ ट्यूब से भी दागेगी एंटी शिप मिसाइल

भारतीय नौसेना की ताकत में एक और तमगा लगा दिया गया है। कालवरी श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी खांदेरी का जलावतरण करके भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया। आज मझगाँव के डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में आधुनिक तकनीकि से लैश खांदेरी का जलावतरण किया गया। केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने इस समारोह की अध्यक्षता की। माना जा रहा है कि खांदेरी के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना की ताकत कई गुना तक बढ़ गई है।

खांदेरी की खासियत
– यह दुश्मन का पता लगते ही उस पर गाइडेड हथियारों से हमला कर सकती है।
– यह पानी के नीचे से और सतह से दोनों तरह से दुश्मन पर हमला कर सकती है।
– इससे टॉरपीडो के साथ-साथ ट्यूब से भी एंटी शिप मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
– इसकी स्टैल्थ टेक्नीक इसे दूसरी सबमरीन्स के मुकाबले शानदार व बेजोड़ बनाती है।
– इस सबमरीन वे सभी काम कर सकती है, जो दूसरी सबमरीन्स करती हैं। जैसे- एंटी अंडरग्राउंड वॉर, एंटी सबमरीन वॉर, इंटेलिजेंस इनपुट्स देना और सर्विलांस करना।

शिवाजी महाराज के किले से मिला नाम
– खांदेरी सबमरीन को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने फ्रांस के मैसर्स डीसीएनसी के साथ मिलकर बनाया है।
– इस सबमरीन का नाम समुद्र के बीच टापू पर बने शिवाजी महाराज के खांदेरी किले के नाम पर रखा गया है।
-किले ने 17th सेंचुरी में समुद्र में मराठों की ताकत को साबित करने में अहम किरदार निभाया था।
– खांदरी दुश्मन के रडार से बच सकती है। इसे भारत में ही तैयार किया गया है।
– स्कॉर्पीन सीरीज की यह दूसरी सबमरीन है। इससे पहले अप्रैल 2015 में कलवरी सबमरीन को समुद्र में उतारा गया था।

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कड़े टेस्ट से पास करना होगा
– 12 जनवरी को समुद्र में उतारे जाने के बाद खांदेरी सबमरीन को दिसंबर 2017 तक कई मुश्किल टेस्ट से गुजरना होगा।
– इसमें बंदरगाह और समुद्र दोनों तरह के टेस्ट शामिल हैं। भारतीय नौसेना में पहली खांदेरी पनडुब्बी 6 दिसंबर 1986 में कमीशन हुई थी।
– करीब 20 साल तक देश की सेवा करने के बाद 18 अक्टूबर 1989 इसे नेवी से रिटायर किया गया।

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