बिहार के शाही लीची को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, …जानिए

बिहार के शाही लीची को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। बौद्धिक संपदा कानून के तहत शाही लीची को तीन साल के प्रयास के बाद भारत सरकार ने जीआई टैग (ज्योग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन) दे दिया है। अब शाही लीची मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली व पूर्वी चंपारण का उत्पाद ही जाना जायेगा। शाही लीची ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ बिहार के नाम से प्रमाणित किया गया है। शाही लीची का जीआई नंबर 552 होगा।

शाही लीची को पहचान दिलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य के लिए 2015 से प्रयास चल रहा था। बिहार लीची उत्पादक संघ के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने बताया कि तीन साल पूर्व उन्होंने आवेदन किया था। जीआई टैग देनेवाले निकाय ने शाही लीची का सौ साल का इतिहास मांगा था। इतिहास नहीं दिये जाने पर सिंह के आवेदन को छांट दिया गया। लेकिन, उन्होंने अपना अभियान जारी रखा। इसके बाद बौद्धिक संपदा विभाग में तीन बार सुनवाई हुई। इसके बाद साक्ष्य प्रस्तुत करने पर पांच अक्तूबर को शाही लीची पर जीआई टैग लग गया। 

शाही लीची क्यों है खास
लीची की विभिन्न 32 प्रजातियों यथा चायना, लौगिया, कसैलिया, कलकतिया आदि में शाही को श्रेष्ठ माना जाता है। यह काफी रसीली होती है। गोलाकार होने के साथ इसमें बीज छोटा होता है। स्वाद में काफी मीठी होती है। एक फल का 80 से 90 फीसदी भाग में पल्प से भरा रहता है। इसमें खास सुगंध होता है।

टैग मिलने से किसानों व ग्राहकों को फायदा
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ विशालनाथ ने बताया कि जीआई टैग मिलने से शाही लीची की बिक्री में नकल या गड़बड़ी की आशंकाएं काफी कम हो जाएंगी। मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली व पूर्वी चंपारण के किसान ही शाही लीची के उत्पादन का दावा कर सकेंगे। ग्राहक भी ठगे जाने से बच सकेंगे।

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जीआई टैग क्या है
भौगोलिक संकेतक किसी उत्पाद को दिया जाने वाला एक विशेष टैग है। जीआई टैग उसी उत्पाद को दिया जाता है: जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है। जिसमें उत्पाद के विशेषताओं का उस स्थान विशेष से गहरा संबंध होता है। जीआई टैग प्राप्त कुछ उत्पाद है। जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) मुख्य रूप से कुछ विशिष्ट उत्पादों जैसे कृषि, प्राकृतिक, हस्तशिल्प, और औद्योगिक सामान को दिया जाता है।

कैसे हासिल किया जाता है जीआई टैग
जीआई टैग लेने के लिए भारत सरकार के जीआई टैग मुख्यालय चेन्नई में आवेदन करना होता है। आवेदन व्यक्तिगत नहीं हो सकता है। इसके लिए अनिवार्य है कि आवेदन उत्पादन से जुड़े किसी संगठन या संघ के द्वारा किया जाये। तकनीकी पहलू, इतिहास आदि की जांच पड़ताल के बाद जीआई टैग दिया जाता है।

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