बिहार की दो हस्तियों को पद्म पुरस्कार, …जानिए

गणतंत्र दिवस से पहले गुरुवार को केंद्र सरकार ने 2017 के लिए पद्म पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। ये पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट सेवाओं और उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किए जाते हैं। इस बार 3 को पद्म विभूषण, 9 को पद्मभूषण और 73 को पद्मश्री सम्‍मान दिया जाएगा। इस तरह इस बार 85 हस्‍तियों को पद्म पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जाएगा।

इस साल घोषित पुरस्कारों में बिहार से भी दो नामचीन हस्तियों के नाम शामिल हैं। बिहार से पद्मश्री शारदा सिन्हा को पद्म भूषण और दरभंगा के वैज्ञानिक डॉ. मानस बिहारी वर्मा को पद्मश्री अवॉर्ड देने की घोषणा की गई है।

लोक गायिका शारदा सिन्हा
एक अक्तूबर 1952 को जन्मीं शारदा सिन्हा प्रसिद्ध लोकगायिका हैं। भोजपुरी, मैथिली, वज्जिका व हिंदी में उन्होंने अनेकों गीत गाये हैं। दुल्हिन, पीरितिया, मेंहदी जैसे उनके कैसेट खूब बिके। उन्होंने मैंने प्यार किया व हम आपके हैं कौन जैसी फिल्मों के लिए भी गीत गाये। बिहार, उत्तरप्रदेश व झारखंड में तो हर घर में उनका नाम जान-पहचाना है और लोगों के बीच उनके गाने बेहद लोकप्रिय हैं।

स्वर कोकिला से लेकर पद्म भूषण तक का सम्मान पा चुकीं बिहार की इस दिग्गज और लोकप्रिय गायिका के छठ गीतों को उनका ट्रेडमार्क माना जाता है। लोक आस्था के महापर्व छठ के गीत अनेक गायकों ने गाया लेकिन शारदा सिन्हा के गाए गीत आज भी सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं।

कौन हैं डॉ. मानस बिहारी वर्मा?
एयरफोर्स के बेड़े में शामिल ‘तेजस’ विमान की नींव रखने वाले वैज्ञानिकों में एक वैज्ञानिक डॉ. मानस बिहारी वर्मा भी हैं। दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड स्थित पूर्वी एवं पश्चिमी कमला तटबंध के मध्य बसे छोटे से गांव ‘बाउर’ में डॉ. मानस बिहारी वर्मा जन्‍में व पले-बढ़े। 10वीं के बाद उन्‍होंने पटना साइंस कॉलेज और बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई की। फिर, सागर विश्वविद्यालय से एमटेक की डिग्री ली।

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पढ़ाई के बाद डॉ. मानस वर्मा ने जीवन देश को समर्पित कर दिया। उन्‍होंने देशहित के कई बड़े प्रोजेक्‍ट में काम किए। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ ‘तेजस’ प्रोजेक्ट उनमें से एक था। डॉ. वर्मा ‘तेजस’ युद्धक विमान के निर्माण के लिए गठित टीम में शामिल करीब 700 इंजीनियरों की टीम में मैनेजमेंट प्रोग्राम डायरेक्टर रहे। वे मैकेनिकल विंग व डिजाइन को देखते थे। साल 2005 में सेवनिवृत्‍त होने तक वे इस प्रोजेक्‍ट के अहम हिस्‍सा रहे। सेवानिवृत्‍त होनें के बाद डॉ. वर्मा अपने गांव में लोगों को विज्ञान के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

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