लोकसभा में कागज फेंकने पर स्पीकर ने रंजीत रंजन समेत 6 सांसदों को किया सस्पेंड, …जानिए

गोरक्षा के नाम पर हिंसा को लेकर सरकार को घेरने में जुटी कांग्रेस पर सोमवार को बीजेपी ने ‘बोफोर्स’ के हथियार से पलटवार किया। मॉब लिंचिंग पर चर्चा की मांग कर रही कांग्रेस पर बीजेपी ने बोफोर्स की फिर से जांच का अस्त्र चला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के में वार-पलटवार के बीच आक्रोशित कांग्रेसी सदस्यों ने स्पीकर की ओर कागज फाड़कर उछाल दिए।

इस घटना से नाराज स्पीकर सुमित्रा महाजन ने छह सांसद रंजीत रंजन, गौरव गोगोई, के सुरेश, अधीर रंजन चौधरी, सुष्मिता देव और एमके राघवन को 5 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया। इसके बाद हुए हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही सत्र के छठे दिन भी चल नहीं पाई।

लोकसभा में सोमवार का दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वार-पलटवार का रहा। कांग्रेस, वाम दलों और कुछ विपक्षी सांसदों ने देश में गोरक्षा के नाम पर कथित गोरक्षकों द्वारा लोगों की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की घटनाओं का मुद्दा सोमवार को भी उठाया और जमकर हंगामा किया।

इसके जवाब में बीजेपी ने बोफोर्स के जिन्न को बोतल से बाहर निकालकर कांग्रेस को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति अपनाई। बीजेपी की तरफ से मोर्चा मीनाक्षी लेखी ने संभाला। उन्होंने टीवी चैनलों को हवाला देते हुए बोफोर्स मामले की फिर से जांच की मांग की। लेखी ने कहा , ‘बोफोर्स की जांच करने वाले शख्स के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री और स्वीडन की पूर्व प्रधानमंत्री के बीच कुछ लेनदेन हुआ। लेनदेन के दस्तावेज आज भी भारत सरकार के डिब्बों में बंद हैं।’

लेखी ने कहा, ‘यह कहना कि पुराना मुद्दा और गड़े मुर्दे नहीं उखाड़े जाने चाहिए, मेरा कहना है कि गड़े मुर्दे जब तक सही तरीके से विधिवत तरीके से दफन नहीं होते, तब तक वे भूत पिशाच बनकर घूमते रहते हैं। आजकल बोफोर्स का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है और जो वापस बोतल से बाहर आया, उसे विधिवित दफन होना चाहिए।’ इसके बाद विपक्ष ने हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामे के बीच कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने प्रश्नकाल के बाद किसी भी विषय पर बात रखने की अनुमति देने का आश्वासन दिया है, लेकिन विपक्ष चर्चा ही नहीं चाहता।

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इसके पहले सुबह सदन की बैठक शुरू होते ही कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सदस्य आसन के सामने आकर गोरक्षा के नाम पर हमलों और कथित हत्याओं पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग करने लगे। कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की हत्या हो रही है और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। लोकसभा अध्यक्ष ने इन सदस्यों से अपने स्थान पर जाने कहा और आश्वासन दिया कि शून्यकाल में उन्हें अपने मुद्दे उठाने की अनुमति दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि सदन को संचालित करने के नियम सभी ने मिल कर बनाए हैं और सभी सदस्यों का दायित्व है कि वे इन नियमों का पालन करें। उन्होंने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि मुद्दे को उठाने का यह कोई तरीका नहीं है और वह प्रश्नकाल स्थगित कर उन्हें यह मुद्दा उठाने की अनुमति कतई नहीं देंगी, लेकिन शून्यकाल में जरूर वह ऐसा करेंगी। हंगामे के बीच ही प्रश्नकाल चला और कई मंत्रियों ने अपने विभागों से संबंधित सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दिया। हालांकि हंगामे के बीच मंत्रियों के जवाब ठीक से नहीं सुने जा सके। कांग्रेस के सदस्य आसन के पास बैठकर नारेबाजी करने लगे।

प्रश्नकाल के बीच ही संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि वह आसन के माध्यम से सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे से अनुरोध करते हैं कि विपक्ष के सांसद आसन के पास न बैठें और और अपनी-अपनी सीट पर चले जाएं। कुमार ने कहा, ‘जैसा कि हम सबने तय किया है कि मिलकर प्रश्नकाल चलाएं। सरकार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। हम किसी विषय पर चर्चा से मुकर नहीं रहे।’ उन्होंने कहा, ‘जिस तरह पिछले हफ्ते हमने कृषि पर चर्चा की थी, उसी तरह इस विषय (कथित गोरक्षकों के हमलों) पर भी चर्चा कर सकते हैं।’ इस बीच नाराजगी जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘वे चर्चा ही नहीं चाहते।’

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उन्होंने विपक्षी कांग्रेस से मुखातिब होते हुए कहा, ‘मैंने शुरू में ही कहा था कि प्रश्नकाल के बाद इस विषय पर बोलने की अनुमति दी जाएगी। अगर आप चर्चा चाहते तो इस तरह से हल्ला नहीं करते। आप केवल हल्ला चाहते हैं।’ इसके बाद आसन के पास बैठे कांग्रेस के सदस्य खड़े हो गए, लेकिन उनकी नारेबाजी जारी रही। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सदन में उपस्थित थीं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी प्रश्नकाल के बीच सदन में पहुंचे।

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