चारा घोटाले मामले में लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा, 5 लाख का जुर्माना

बिहार की राजनीति के केंद्र बिंदु रहे राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव को चारा घोटाले के एक मामले में आज रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने शाम चार बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सजा सुना दी। लालू को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई है। लालू को सजा के अलावा पांच लाख का जुर्माना भी कोर्ट ने लगाया है। कोर्ट ने जुर्माना नहीं देने पर लालू को 6 महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है।

वहीं अन्‍य अरोपी महेंद्र, राजाराम, सुनील कुमार सिन्हा, सुशील कुमार को भी साढ़े तीन साल की सजा और 5 लाख जुर्माना देना होगा। फूलचंद, महेश और बेक जूलियस को भी साढ़े तीन साल की कैद और 5 लाख जुर्माना देना होगा। सुनील गांधी, त्रिपुरारी, अजय अग्रवाल, गोपीनाथ को 7 साल की कैद और 10 लाख जुर्माना देना होगा। जगदीश शर्मा को सात साल की सजा और 10 लाख का जुर्माना देना होगा।

क्या है चारा घोटाला?
उल्लेखनीय है कि चारा घोटाले का यह मामला देवघर कोषागार से 89 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी का है। सीबीआई ने इस मामले में 15 मई 1996 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी तथा 28 मई 2004 को आरोप पत्र दायर किया था। इस मामले में 26 सितंबर 2005 को आरोप गठन किया गया था। इस मामले में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशु चारा और दवा के नाम पर अवैध निकासी की थी। इसके लिए फर्जी आवंटन आदेश का इस्तेमाल किया था। जांच से बचने के लिए टुकड़ों-टुकड़ों में 10 हजार रुपये से कम का बिल ट्रेजरी में पेश किया था।

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इस मामले में पिछले वर्ष 23 दिसंबर को अदालत ने राजद अध्यक्ष श्री यादव, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व विधायक आर. के. राणा, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी फूलचंद सिंह, बेक जुलियस एवं महेश प्रसाद के अलावा अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, सुबीर भट्टाचार्य,सप्लायर और ट्रांसपोर्टर त्रिपुरारी मोहन, सुशील सिंह, सुनील सिंह, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल, ज्योति कुमार झा और सुनील गांधी को भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 477 ए और 120 बी के तहत दोषी करार दिया था।

वहीं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र, पूर्व पशुपालन मंत्री विद्यासागर निषाद, लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, प्रशासनिक अधिकारी ए. सी. चौधरी के अलावा सप्लायर और ट्रांसपोर्टर सरस्वती चंद्रा तथा साधना सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था।

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