कैंसर का है खतरा! मत खाइए ये मछली, …जानिए

मछली खाने – खिलाने के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए है। आंध्र प्रदेश की मछली मेडिकल टेस्ट में फेल हो गई। बताया जाता है कि यहां की मछली से कैंसर होने का भी खतरा है। इस वजह से बिहार सरकार ने आंध्र प्रदेश से आने वाली मछली की बिक्री पर रोक लगा दी है।

शनिवार को पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने बताया कि आंध्र प्रदेश से आने वाली मछलियों में केमिकल फार्मेलिन पाया गया। केमिकल फार्मेलिन का इस्‍तेमाल मछलियों को अधिक दिनों तक प्रीजर्व रखने के लिए किया जा रहा है आंध्र प्रदेश के कारोबारियों द्वारा। होता यह है कि आंध्र प्रदेश से बिहार में मछलियों को लाने में सड़क मार्ग से कई दिन लग जाते हैं। ऐसे में, इसे प्रीजर्व रखने को फार्मेलिन का प्रयोग किया जा रहा था। फार्मेलिन वाली मछली खाने वालों में कैंसर की आशंका को देखते हुए सोमवार एक अक्टूबर से बिहार में आंध्र प्रदेश से आने वाली मछली की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। इसके संबंध में आवश्‍यक दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।

दरअसल, मामला यह है कि बिहार सरकार को मछली में केमिकल फार्मेलिन के प्रयोग की शिकायतें मिली थीं। यह फार्मेलिन हमारे – आपके भीतर कैंसर रोग की संभावनाओं को जन्‍म देता है। जानकारी के बाद फार्मेलिन के माध्‍यम प्रीजर्व कर आंध्र प्रदेश से बिहार लाई जा रही मछलियों को लैब टेस्टिंग के लिए कोलकाता और सीएफआरआई कोचीन की लैबोरेटरी में भेजा गया। लैब टेस्टिंग की मिली रिपोर्ट में शिकायतें सही पाई गईं हैं।

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आपकी जानकारी को बिहार में प्रतिवर्ष 6.42 लाख मैट्रिक टन मछली की खपत है। यह प्रत्‍येक साल बढ़ ही रहा है। जबकि वर्तमान में 5.87 लाख मैट्रिक टन मछली का होता है उत्पादन। जानकारी के मुताबिक 55,000 मैट्रिक टन मछली का आयात होता है। वहीं 32,000 मैट्रिक टन मछली का निर्यात भी होता है।

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