समान काम के बदले समान वेतन मामले में सुप्रीम कोर्ट से बिहार सरकार को फटकार, …जानिए

बिहार के करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन वाले मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज सोमवार को पहली सुनवाई की और बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पटना हाइकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया है और इस मामले में टीम गठित कर पूरी रिपोर्ट देने की बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि जब अापने नियोजित शिक्षकों को पढ़ाने के लिए रखा तब उनकी क्वालिफिकेशन पर क्यों आपत्ति नहीं जताई? लेकिन जब समान काम का समान वेतन देने की बात आई तो आपने उनकी क्वालिफिकेशन पर प्रश्नचिन्ह लगाया, जबकि उन्हीं शिक्षकों से पढ़कर कितने छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

हालांकि इसपर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन कर शिक्षकों के क्वालिफिकेशन के मामले में जांच कर पूरी रिपोर्ट सौंपनी होगी। कोर्ट ने कहा कि यह कमेटी तीन सप्ताह में रिपोर्ट देगी, जिसे अगली सुनवाई में कोर्ट में पेश किया जाएगा। साथ ही भारत सरकार को भी निर्देशित किया गया है कि अापके द्वारा दिए जा रहे अंशदान के आंकड़े के साथ एएसजी भारत सरकार भी उपस्थित होंगे। 15 मार्च को इस मामले की अगली सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने दो टूक कहा था कि वो भी शिक्षकों के हितों की लड़ाई अंत तक लड़ेंगे और बिहार के नियोजित शिक्षकों को उनका हक़ दिलाकर ही दम लेंगे। बिहार सरकार के इस फैसले को न ही जनता माफ़ करेगी और न ही शिक्षक। इतना ही नहीं, राज्य भर के नियोजित शिक्षक बिहार सरकार के खिलाफ मिलकर आंदोलन करेंगे। वहीं नियोजित शिक्षकों के तमाम संगठनों ने भी एक फरवरी से हड़ताल करने का मन बनाया है।

बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में पटना हाईकार्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। पटना हाईकोर्ट ने इस पर भी आश्चर्य प्रकट किया था कि एक ही स्कूल में दो तरह के वेतन दिये जा रहे हैं। कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन देने का भी निर्देश दिया था। पटना हाईकोर्ट के फैसले से नियोजित शिक्षकों में काफी उत्साह भी जगा था, लेकिन अचानक नियोजित शिक्षकों को तब झटका लगा, जब कोर्ट के फैसले का आकलन करने के बाद सरकार ने संसाधनों की कमी का हवाला देकर इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। हालांकि इसे लेकर बिहार सरकार के खिलाफ तमाम नियोजित शिक्षक गुस्से में हैं, वहीं बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ भी सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा है।

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