शराबबंदी मामले में नीतीश सरकार को ‘सुप्रीम’ झटका, …जानिए

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिसमें राज्य की चार इंडस्ट्रियल अल्कोहल निर्माता कंपनियों के उत्पादन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें आदेश नहीं मानने के खिलाफ 10 जनवरी को उत्पाद विभाग के आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

बताते चलें कि इंडस्ट्रीयल अल्कोहल से शराब बनाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आरएफ नरीमन एवं न्यायाधीश नवीन सिन्हा की खंडपीठ ने बिहार डिस्टलरी, ग्लोबल स्प्रिट, एससीआइ लिमिटेड एवं एमजे लिमिटेड कंपनी के उत्पादन पर रोक लगाने वाली विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। गौरतलब हो कि राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2017 को इन कंपनियों के उत्पादन पर रोक लगा दी थी। बाद मे हाईकोर्ट ने रोक हटा दी थी।

इन कंपनियों के वकील सत्यवीर भारती ने बताया कि राज्य सरकार की किसी दलील को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। गौरतलब हो कि पटना हाईकोर्ट की फुल बेंच ने 10 जनवरी को उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव एवं आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इंडस्ट्रियल अल्कोहल के उत्पादन पर रोक लगा दी थी। राज्य सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट ने पिछले साल 5 मई को अवैध करार कर दिया था। कोर्ट ने अपनी सुनवाई में राज्य सरकार को तीन सप्ताह में अपना पक्ष रखने की हिदायत देते हुए पूछा था कि अदालत के आदेश का पालन नहीं किये जाने पर क्यों नहीं अवमानना का मामला चलाया जाए?

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कोर्ट को यह भी बताया गया था कि राज्य सरकार दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। इन कंपनियों को दिशा निर्देश जारी कर कहा गया है कि वे अपने माल को प्रदेश से बाहर भी वैसी कंपनियों को बेचें जो शराब नहीं बनातीं। ये कंपनियां स्प्रिट में केमिकल डाल कर बाहर भेजें ताकि उससे शराब नहीं बन सके।

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