वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटक बोटिंग से कर सकेंगे जटाशंकर और कौलेश्वर स्थान के दर्शन, …जानिए

“बिहार के कश्मीर” नाम से मशहूर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटक अब नावों के द्वारा धार्मिक स्थलों का दर्शन कर सकेंगे। जलसंसाधन विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। वाल्मीकी टाइगर रिजर्व में इको पार्क के निर्माण के बाद ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की ओर यह एक नई पहल है।

प्रकृति की गोद मे बसे वाल्मीकि टाइगर परियोजना की खूबसूरती का आनंद लेने हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। सरकार ने पर्यटकों के लिए जंगल सफारी, बैम्बू हट, लक्ष्मण झूला और इको पार्क जैसे स्थलों का निर्माण कराया है। खासकर यहां के धार्मिक स्थल भी पर्यटकों को खूब लुभाते हैं।

नदी मार्ग से भी आवागमन
दरअसल पहले त्रिवेणी संगम, वाल्मीकि आश्रम, प्राचीन शिव मंदिर जटाशंकर और कौलेश्वर स्थान जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुचने के लिए पर्यटकों को जंगल में बनाये गए पथरीले रास्तों से गुजरना पड़ता था। ऐसे में अब विभाग नदी मार्ग से भी आवागमन बहाल करने जा रही है। त्रिवेणी संगम स्नान और मौनी अमावस्या के समय भी बिहार, उत्तरप्रदेश और नेपाल से लाखों श्रद्धालु यहां गण्डक नदी में स्नान करने आते हैं। मंदिरों के दर्शन को भी लोगों की भारी भीड़ यहां जुटती हैं।

पर्यटकों की सुविधा के लिए तमाम इंतजाम
जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता नंदलाल झा का कहना है कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए बोटिंग की व्यवस्था शुरु की जा रही है। काली स्थान से लेकर कौलेश्वर स्थान तक गण्डक नदी के किनारे 4 फीट चौड़ी पाथ-वे बनाई जा रही है और नदी मार्ग से नाव की भी व्यवस्था की जा रही है। कौलेश्वर स्थान के पास श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के लिए 32 फीट चौड़ी सीढ़ी का भी निर्माण किया जाएगा।

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