पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए अब घर बैठे ही कर सकते हैं गया में पिंडदान, …जानिए

श्राद्ध पक्ष में पिंडदान करने का काफी महत्व बताया गया है। लोग इन दिनों पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए पिंडदान करते हैं। वैसे तो भारत में पिंडदान करने के कई तीर्थस्थल है लेकिन उनमें से बिहार के मोक्ष नगरी गया को महत्पवूर्ण स्थान माना गया है। गया में इन दिनों पिंडदान के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

लेकिन अगर आप किसी करण से यहां नहीं आ सकते तो पर्यटन विभाग आपके लिए ‘ई-पिंडदान’ का पैकेज लेकर आया है। ई-पिंडदान की सुविधा लेने के लिए श्रद्धालुओं को पहले बुकिंग कराना होगा। इसके लिए वेबसाइट pitrapakshgaya.com जारी किया गया है। ई-पिंडदान का पैकेज 28 सितंबर तक लिया जा सकता है। इस सुविधा के माध्यम से देश-विदेश के लोग घर बैठे पितरों का तर्पण और पिंडदान कर सकते हैं। इसके लिए 19 हजार की दक्षिणा के साथ जीएसटी के लिए 950 रुपये का भुगतान करना होगा।

इसके बाद श्रद्धालु का रजिस्ट्रेशन किया जायेगा और गया में उनके पितरों का तर्पण और पिंडदान का कार्य किया जायेगा। पैकेज के तहत विष्णुपद मंदिर औक अक्षयवट में पिंडदान और फल्गु में तर्पण का कार्य कराया जाएगा। साथ ही प्रक्रिया के बाद पूजन सामग्री, दान-दक्षिणा, कर्मकांड की वीडियो क्लीपिंग, फोटोग्राफ आदि सभी श्रद्दालु हासिल कर सकते हैं।

शास्त्रों अनुसार गया में पिंडदान करना काफी फलदायी बताया गया है। कहा जाता है कि भगवान राम और सीताजी ने भी राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए यहीं पिंडदान किया था। इसलिए पितृ पक्ष में बड़ी संख्या में लोग अपने पितरों की शांति के लिए यहां पहुंचते हैं। लेकिन समय के साथ पिंडदान की प्रक्रिया और गया की व्यवस्था में काफी बदलाव आया है। गया के बारे में प्रसिद्ध है कि यहां जो भी पिंडदान करने आते हैं, वे पूर्वजों के हस्तलिखित बही खाते पर दस्खत देखकर ही तीर्थ पुरोहित को अपना पंडाजी मानकर कर्मकांड संपन्न कराते हैं। यहां के तीर्थ पुरोहितों के पास कई वर्ष तक के बही-खाते सुरक्षित हैं।

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