बिहार के युवा वैज्ञानिक अमल पुष्प का दुनिया ने माना लोहा, …जानिए

बिहार की राजधानी पटना के रहनेवाले 18 साल के अमल पुष्प को रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ने ‘ब्लैक होल’ पर किए गए उनके रिसर्च पेपर वर्क की बदौलत फेलोशिप के लिए चुना है। अमल पुष्प की छोटी-सी उम्र की इस बड़ी उपलब्धि ने बिहार के साथ-साथ भारत के लोगों को भी गर्व करने का मौका दिया है।

कैम्ब्रिज विवि के खगोलविद ने किया था नामांकित
ब्रिटेन की रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी सोलर साइंसेज और एस्ट्रॉनॉमी साइंसेज के लिए युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करती है। इस सोसाइटी की स्थापना 1820 में हुई थी और इसमें चार हजार सदस्य हैं। इसका मुख्यालय बर्लिंगटन हाउस, लंदन में है। रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी के फेलोशिप के लिए अमन को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शीर्ष ब्रिटिश खगोलविद और एमरिटस प्रोफेसर लॉर्ड मार्टिन रीस की ओर से नामांकित किया गया था।

पटना के स्‍कूल में नौवीं का छात्र है अमल
अमल डीपीएस, पटना में 12वीं का छात्र है। उसके पिता, संजय कुमार केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड में अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। मां पुष्पा कुमारी गृहिणी हैं। अमल कहता है कि वह बचपन से ही रात में चांद-तारों को देखा करता था, सूरज और ग्रहों के बारे में जानने की कोशिश करता था। नौवीं क्लास में मैं फिजिक्स में इसके लिए एक्सपेरिमेंट्स आरंभ कर दिए।

बचपन से है सोलर सिसटम में रूचि
अमल पुष्प ने एक अंग्रेजी अखबार को दिेए इंटरव्यू में बताया था कि उसे बचपन से ही सोलर सिस्टम और एक्लिप्स के बारे में जानने की उत्सुकता है। उसका स्कूल खगौल में है, जहां बहुत कुछ इस बारे में जानने को मिला।

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केवल पुरस्कार नहीं, मेंबरशिप भी मिली
वहीं, रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी सोलर साइंसेज और एस्ट्रॉनॉमी साइंसेज के डिप्टी एक्जीक्यूटिव डायरेकरॉबर्ट रॉबर्ट मेसी ने बताया कि पटना के युवा वैज्ञानिक अमल पुष्प को ये सम्मान दिया गया है। उन्होंने बताया कि ये केवल पुरस्कार ही नहीं है बल्कि ये हमारी सोसायटी की मेंबरशिप भी है।

क्‍या है ब्‍लैक होल, जानिए
बता दें कि नासा के वैज्ञानिकों ने सबसे अधिक दूरी पर स्थित एक विशालकाय ब्लैक होल का पता लगाया था जो सूर्य के द्रव्यमान से 80 करोड़ गुणा बड़ा है। ‘ब्लैक होल’ के बारे में ये भी कहा जाता है कि इस खगोलीय विवर में जो भी वस्तु जाती है वह वापस नहीं लौटती। ब्लैक होल स्पेस में वो जगह है जहां भौतिक विज्ञान का कोई नियम काम नहीं करता।

ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत शक्तिशाली होता है। इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता। प्रकाश भी यहां प्रवेश करने के बाद बाहर नहीं निकल पाता है। यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है। आइंस्टाइन बता चुके हैं कि किसी भी चीज़ का गुरुत्वाकर्षण स्पेस को उसके आसपास लपेट देता है और उसे कर्व जैसा आकार दे देता है।

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