बिहार: 2022 से पटना में दौड़ेगी मेट्रो, …जानिए

दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर पटना मेट्रो की शुरुआत भी जल्द होने वाली है। वही रेड, ब्लू, ग्रीन, परपल, पिंक लाइन से मेट्रो रूट को पहचाना जाएगा। जैसा दिल्ली में मेट्रो में सफ़र करने वाले करते हैं।

पटना मेट्रो प्रोजेक्ट के एक फेज का काम 2019 से शुरू हो जायेगा। राजधानीवासियों को पहली मेट्रो सेवा से सफर करने का मौका संभवत: 2022 से मिलने लगेगा। मेट्रो प्रोजेक्ट पर पहला कार्य नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर होगा।

इसका पहला रूट मीठापुर से बैरिया स्थित अंतरराज्यीय बस पड़ाव तक छह किलोमीटर का होगा। इसके बाद अन्य रूटों पर निर्माण शुरू होगा। नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने शुक्रवार को बताया कि केंद्र सरकार ने नयी मेट्रो पॉलिसी तैयार की है।

बिहार सरकार ने पूर्व में पटना मेट्रो की डीपीआर तैयार कर दिसंबर, 2016 में केंद्र सरकार को सौंप दी थी। डीपीआर भेजने के बाद केंद्र सरकार ने नयी नीति तैयार की है। इसलिए अब नयी मेट्रो नीति के अनुसार पटना मेट्रो की डीपीआर में संशोधन का काम केंद्र की एजेंसी राइट्स लिमिटेड को सौंपा गया है। राइट्स ने ही पहले डीपीआर तैयार की थी। उसे इसमें संशोधन के लिए छह माह का समय दिया गया है।

कैसे बढ़ी मेट्रो की गति
पटना मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग ने 18 जून, 2013 को संकल्प लिया। इसके बाद 11 नवंबर, 2013 तक नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किये गये थे। कैबिनेट की मंजूरी के पहले सरकार ने 28 जनवरी, 2015 को इन्वेस्टर मीट आयोजित की।

निवेशकों के सुझावों के बाद राज्य कैबिनेट ने नौ फरवरी, 2016 को इसको मंजूरी दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने मेट्रो का प्रेजेंटेशन 20 मई, 2015 को किया गया। पूर्व निर्धारित डीपीआर के अनुसार इस प्रोजेक्ट की लागत 16 हजार 960 करोड़ आंकी गयी थी।

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55 स्टेशन प्रस्तावित
राजधानी में राइट्स द्वारा तैयार की गयी मेट्रो की डीपीआर में 55 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। औसतन प्रति किलोमीटर पर एक मेट्रो स्टेशन तैयार करने की योजना है। मेट्रो रेल की कुल लंबाई 60 किलोमीटर होगी।

इसके लिए पांच कॉरिडोर तैयार किये जाने हैं। पूर्व की डीपीआर में सबसे बड़ा मेट्रो रेल मार्ग 16 किलोमीटर का है, जो नाॅर्थ-साउथ कॉरिडोर के नाम से जाना जायेगा। यह पटना जंक्शन से शुरू होकर पटना शहर के गांधी मैदान, पीएमसीएच, पटना विश्वविद्यालय, राजेंद्र नगर, एनएमसीएच, जीरोमाइल होते हुए आइएसबीटी तक जायेगा।

प्रोजेक्ट के लिए चाहिए जमीन
-58,321 वर्ग मीटर सरकारी जमीन
-81,830 वर्ग मीटर निजी जमीन
-157 निजी संपत्ति
-38 सरकारी संपत्ति
-53,173 वर्ग किलोमीटर कुल क्षेत्रफल

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