भूख से लड़ती है पटना के युवाओं की ये ‘रॉबिनहुड आर्मी’, …जानिए

बिहार की राजधानी पटना में कई गरीब परिवार ऐसे हैं, जिन्हें दो जून की रोटी भी नसीब नहीं होती। आस-पास मेहनत-मजदूरी कर वे किसी तरह परिवार पालते हैं। कभी-कभी तो घर में चूल्हा तक नहीं जलता। ऐसे में इन घरों के बच्चे भूखे पेट सोने को मजबूर होते हैं। समाज के ऐसे गरीब एवं उपेक्षित तबकों की भूख मिटाने का जिम्मा उठा रही है – ‘रॉबिनहुड आर्मी’। इस आर्मी से करीब 100 युवा जुड़े हैं, जो दोनों वक्त का खाना लेकर वंचितों के घर पहुंचते हैं।

पांच साल से काम कर रही टीम
रॉबिनहुड आर्मी में छात्र और नौकरीपेशा दोनों शामिल हैं। इनका उद्देश्य होता है कि हर भूखे को दोनों समय का भोजन मिले। इन लोगों ने शहर के ऐसे इलाकों की बस्तियां चिन्हित कर रखी है, जहां भूख से लाचार लोगों की संख्या ज्यादा होती है। टीम के संतोष और अमित कुमार कहते हैं, हमारी टीम भुखमरी के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं। शुरुआती दिनों में समाज से बहुत कम सहायता मिलती थी लेकिन वक्त के साथ बड़े-बड़े होटलों समेत समाज के लोगों का सहयोग मिलता गया। हमारा प्रयास है कि कोई भी बच्चा या व्यक्ति भूखा नहीं सोए। टीम ने इसे अपना मिशन बना लिया है।

ऐसे होता है भोजन का इंतजाम
गरीबों तक खाना पहुंचाने के लिए यह टीम होटल, पार्टियों, शादी समारोह और कैंटीन में बचा खाना जमा करती है। टीम सदस्य पटना के होटल आरमां, यो चाइना, एलबीडब्ल्डयू, रोटी, मारवाड़ी आवास, जाफरान जैसी जगहों से खाना लाते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग कैटेग्री का काम करने वाले मैरिज हॉल के संचालक भी उन्हें भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करवाते हैं। लोगों को रोज ताजा खाना ही सर्व किया जाता है।

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शिक्षा पर भी जोर देती है टीम
टीम सदस्यों के मुताबिक, बस्तियों में लोगों को भोजन देने के साथ-साथ उन्हें इस बात के लिए प्रेरित करते हैं कि वे अपने बच्चों को पढ़ाएं भी। कई जगह वालेंटियर भी बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। छुट्टी के दिन बच्चों की क्लास लगाई जाती है। इससे कई बच्चे पढ़ाई-लिखाई में रुचि रखने लगे हैं।

फेसबुक के माध्यम से जुड़ते हैं नए लोग
रुकनपूरा, बेली रोड के छोटे-छोटे स्लम क्षेत्रों में सुबह और शाम रॉबिनहुड आर्मी के सदस्य लोगों को खाना खिलाते हैं। रॉबिनहुड आर्मी के नाम से फेसबुक पर पेज है। आर्मी की सहायता करने वाले लोग इस पेज के माध्यम से जुड़ते हैं। अभी तक करीब चार सौ लोगों ने रॉबिनहुड आर्मी में अपना पंजीकरण करवाया है। संतोष बताते हैं कि आने वाले समय में रॉबिन हुड कुछ और नई शुरुआत करने वाला है, जिससे स्लम के बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ नई सुविधाएं भी दी जाएंगी।

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