बिहार में यूपी डायल- 100 के तर्ज पर कंट्रोल रूम का प्रस्ताव: ऐसे करता है काम, …जानिए

यूपी डायल- 100 सेवा की सफलता एवं ख्याति से प्रेरित होकर अब बिहार भी डायल-100 योजना लागू करने जा रहा है। यूपी में लागू यह योजना सबसे बेहतर पुलिस आपातकालीन सेवा है।

यूपी डायल- 100 की तर्ज पर बिहार में पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित करने का प्रस्ताव बीपीआरडी (ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट) ने दिया है। यूपी डायल- 100 आम जनता के लिए बेहद ही प्रभावी और किसी भी विषम परिस्थिति में कारगर है।

गुरुवार को बिहार पुलिस मेस में बीपीआरडी के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय बैठक में दूसरे राज्यों में बेहतर पुलिसिंग में हो रही नयी तकनीकों के उपयोग और नये प्रयोगों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए बीपीआरडी की प्रमुख मीरन सी बोरवांकर ने कहा कि बिहार में भी डायल- 100 सेवा को जल्द शुरू करने की सिफारिश की गयी है। इस मामले में डीजीपी से बात हुई है। उन्होंने कहा कि बिहार को सीसीटीएन (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क) प्रोजेक्ट को जल्द ही पूरा करने के लिए कहा गया है।

क्योंकि देश में सिर्फ बिहार ही एकमात्र राज्य है, जहां अभी तक यह व्यवस्था शुरू ही नहीं हुई है। बैठक के दौरान यूपी डायल- 100 को पब्लिक के लिए सबसे बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने वाला माध्यम माना गया। इस प्रोजेक्ट से जुड़े सभी पहलूओं और क्रियान्वयन पर यूपी में डायल- 100 की कमान संभाल रहे एडीजी अनिल कुमार अग्रवाल ने विस्तार से जानकारी दी।

बैठक के दौरान असम के साइबर डोम सॉफ्टवेयर की भी काफी सराहना की गयी। यह सॉफ्टवेयर साइबर अपराध से लड़ने में बेहद कारगर साबित हो रहा है। इसके अलावा सीआइएसएफ की तरफ से ई-क्लासरूम या ई-टिचिंग प्रणाली के जरिये जवानों को ऑनलाइन ट्रेनिंग की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। ट्रेनिंग के लिए जगह की कमी होने पर प्रणाली कारगर है। इनफॉरमेशन ऑन सिक्योरिटी विषय पर भी चर्चा हुई, ताकि सुरक्षा में कारगर मानकों का उपयोग हो।

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ऐसे काम करता है यूपी का डायल- 100
यूपी के एडीजी अनिल कुमार अग्रवाल ने बताया कि पूरे प्रदेश में किसी स्थान से फोन करने पर औसतन 20 मिनट में पुलिस की टीम वहां पहुंच जाती है। इसे ऑपरेट करने के लिए लखनऊ में एक ऑपरेशन सेंटर बनाया गया है। 100 नंबर डायल करने पर सीधे फोन यहां पहुंचता है।

इससे जुड़े राज्यभर में तीन हजार से ज्यादा पेट्रोलिंग गाड़ियां है, जो चौबीस घंटे घूमती रहती हैं। सभी गाड़ियां जीपीएस, वायरलेस समेत अन्य आधुनिक संसाधनों से लैस हैं।

कोई फोन आने पर संबंधित इलाके के सबसे नजदीक मौजूद गाड़ी को तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना कर दिया जाता है। फोन कॉल को सुनने के लिए ऑउटसोर्सिंग पर 400 कम्यूनिकेशन ऑफिसर के साथ-साथ 300 जवानों को डिस्पैच के रूप में तैनात किया गया है।

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