पूर्व PM मनमोहन ने देश की गिरती अर्थव्यवस्था पर जताई चिंता, कहा- राजनीतिक बदले का एजेंडा छोड़ अर्थव्यवस्था संभालें सरकार

सकल घरेलु उत्पाद यानी जीडीपी (GDP) की दर 5 फ़ीसदी पहुँच जाने पर जहाँ विपक्षी पार्टीयाँ केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर और मन ही मन खुश है कि इससे मोदी सरकार के अर्थ निति की विफलता उजागर हुई है। वहीं, देश की गिरती अर्थव्यवस्था पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि पिछली तिमाही में जीडीपी का 5 फीसदी पर आना दिखाता है कि अर्थव्यवस्था एक गहरी मंदी की ओर जा रही है।

रविवार को देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट गिरकर ​महज 5 फीसदी पहुँच जाने पर चिंता जताते हुए कहा है, भारत के पास तेजी से विकास दर की संभावना है लेकिन मोदी सरकार के कुप्रंधन की वजह से मंदी आई है।

देश के महान अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधामंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि यह परेशान करने वाला है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ रेट 0.6 फीसदी पर लड़खड़ा रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि हमारी अर्थव्यवस्था अभी तक नोटबंदी और हड़बड़ी में लागू किए गए जीएसटी से उबर नहीं पाई है।

उन्होंने कहा है, भारत इस लगातार मंदी को झेल नहीं सकता है। इसलिए हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि अपनी राजनीतिक बदले के एजेंडे को किनारे रखे और समझदार लोगों से बात कर हमारी अर्थव्यवस्था को नई राह दिखाए जो पैदा किए गए संकट में फंस गई है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी दर का महज 5 फीसदी तक सिमट कर रह जाना। देश के लिए एक बड़ी मंदी की ओर इशारा कर रहा है। इसको लेकर सरकार के तरफ से कई उपाय किये गए है, लेकिन अर्थव्यवस्था की समझ रखने वालें जानकारों का कहना है कि सरकार द्वारा इस मुद्दे पर उठाया गया कदम नाकाफी है। हालाँकि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का इस पर कहना है कि हमारी विकास दर कई देशों की तुलना में ठीक है और जीडीपी दर में गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक मंदी है।

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