पूर्णिया में पहली बार काशी की तर्ज पर कोसी की महाआरती

बिहार के पूर्णिया सिटी के सौरा नदी के तट पर बुधवार को काशी की तरह विहंगम दृश्य दिखा। काशी की गंगा की तर्ज पर पहली बार कोशी की महाआरती उतारी गई और इसी के साथ पूर्णिया के इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया। अपार जनसमूह कोशी की इस महाआरती का साक्षी बना। श्रीराम सेवा संघ की पहल पर हुई इस महाआरती को देखने के लिए बुधवार को दिन ढलने के पहले से ही लोग सिटी कालीबाड़ी में जुटने लगे थे।

चार बजे तक सौरा नदी का तट दोनों तरफ से भर गया था। हालांकि आरती का समय पांच बजे निर्धारित था पर करीब एक घंटा विलंब से छह बजे आरती की शुरूआत हुई।

ठीक 06:05 बजे बनारस से आए आचार्य सुरेश शर्मा, भीष्म, और रामकृष्ण दूबे, विनित तिवारी के साथ दीपक झा व अन्य पंडितों की टीम ने शंख को ध्वनि देना शुरू किया तो पूरा सिटी गूंज उठा। फिर देखते-देखते मंत्रोच्चार के साथ महाआरती की शुरुआत हुई।

लाउडस्पीकरों पर गूंजते मंत्र के साथ जब महाआरती शुरू हुई तो तमाम श्रद्धालु करबद्ध मुद्रा में खड़े होकर ‘कोशी मैया का जयकारा लगाने लगे। करीब 45 मिनट तक लगातार महाआरती होती रही और इस बीच श्रद्धालुओं का सैलाब इस अद्भुत दृश्य का आनंद लेता रहा। इस विहंगम दृश्य को देखने के लिए न केवल पूर्णिया सिटी बल्कि पूरे जिले के लोग जुट गये थे। नदी की दूसरी तरफ भी लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी जहां पर्याप्त रोशनी का इंतजाम किया गया था।

उधर, सौरा पुल पर भी लोगों का जमघट लग गया था जिससे कुछ घंटों के लिए ट्रैफिक की रफ्तार थम गई। इस बीच पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए एहतियाती व्यवस्था की गई थी। सौरा घाट और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए थे। पुलिस के वरीय अधिकारी खुद भी मजिस्ट्रेट के साथ हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे। इस बीच घाट को बिजली के रंग-बिरंगे बल्बों की झिलमिलाती रोशनी से आकर्षक रूप से सजाया गया था।

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पूर्णिया के भाजपा विधायक विजय खेमका पहले से उपस्थित थे जबकि श्रीराम सेवा संघ के राणा प्रताप सिंह, आतिश सनातनी, दीपक झा, अंकित सिंह, अक्षय मिश्रा, शशिरंजनविजय मंडल मनीष बाबा, राहुल राज आदि व्यवस्था में जुटे हुए थे।

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