जानिए क्यों मनाया जाता है रामनवमी का त्‍योहार

रामनवमी हिंदुओं का एक बड़ा और प्रमुख त्‍योहार माना जाता है। रामनवमी का त्‍योहार हर वर्ष मार्च से अप्रैल के बीच में पड़ता है यानी “चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि” को मनाया जाता है। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी का जन्म अयोध्‍या नगरी में हुआ था। उनके जन्‍मदिन पर उत्‍तर भारत में काफी खुशी का माहौल रहता है तथा लोग इसे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाते हैं। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य प्राप्‍त करते हैं।

कहते हैं अगर रामनवमी को भगवान राम की पूजा पूरी और उपवास पूरी श्रद्धा से की जाए तो भगवान जी भक्‍त की पुकार जल्‍दी सुनते हैं। इस दिन लोग प्रात: काल स्नान करके उगते हुए सूर्य की सबसे पहले प्राथना करते हैं। सूर्य शक्ति का प्रतीक है और यह माना जाता है कि सूर्य भगवान राम के पूर्वज है। स्‍नान करने के बाद भक्‍त सारा दिन भगवान राम का स्‍मरण भजन और पूजन से करते हैं। घरों और मंदिरों में राम चरित मानस पढ़ी जाती है। इसके साथ ही भंडारे और प्रसाद को भक्तों के समक्ष वितरित किया जाता है। इस दिन काफी लोग व्रत भी रखते हैं।

इस पर्व के साथ ही मा दुर्गा के नवरात्रों का समापन भी जुड़ा है। इस तथ्य से हमें ज्ञात होता है कि भगवान श्री राम जी ने भी देवी दुर्गा की पूजा की थी और उनके द्वारा कि गई शक्ति पूजा ने उन्हें धर्म युद्ध में विजय प्रदान की। इस प्रकार रामनवमी के दिन दो महत्वपूर्ण त्योहारों होते हैं। कहा जाता है कि इसी दिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस की रचना का आरंभ भी किया था।

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