इस बुजुर्ग दंपति ने घर की जमीन दे दी स्कूल को दान, अब फुटपाथ पर करते हैं जीवन-यापन

बिहार के सीतामढ़ी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएगें। खुद अशिक्षित हैं, मगर शिक्षा के प्रति सकारात्मक भाव के कारण गरीबी की मार झेलने के बावजूद भी अपनी जमीन स्कूल खोलने के लिए दान दे दी।

दरसल सीतामढ़ी जिला मुख्यालय से सटे भासर धरमपुर गांव के राजकिशोर गोसाई के पास न तो अपार संपत्ति है और न ही शिक्षा, लेकिन सोच दूरगामी है। उन्होंने गांव में स्कूल को जीवंत रखने के लिए घर की ढाई कट्ठा जमीन दान में दे दी।

इस भूमि पर उत्क्रमित मध्य विद्यालय संचालित है, जहां करीब चार सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। राजकिशोर दोनों पैर से लाचार हैं। स्कूल को जमीन देने के बाद आजीविका चलाने के लिए खुद फुटपाथ पर लटकेना बेच रहे हैं। राजकिशोर गोसाई के दो पुत्र हैं, लेकिन दोनों मंदबुद्धि और शारीरिक रूप से कमजोर हैं। इस काबिल नहीं हैं कि अर्थोपार्जन कर सकें।

धरमपुर के बच्चों को स्कूल जाने की समस्या थी। 2004 में जब धरमपुर में ही स्कूल खोलने की बात हुई तो गांव के रसूखदार जमीन देने से पीछे हट गए। तब निरक्षर राजकिशोर ने गांव के बच्चों के पढऩे के लिए अपने हिस्से की पूरी जमीन स्कूल के लिए दान दे दी।

50 वर्षीय राजकिशोर बताते हैं कि गांव के बच्चों को स्कूल जाते देख सुकून मिलता है। कहते हैं कि उनके पास करीब दस कट्ठा जमीन थी। पांच कट्ठा जमीन इलाज के लिए बेच दी। ढाई कट्ठा जमीन बेटों के हिस्से में छोड़ दी और ढाई कट्ठा जमीन स्कूल के लिए दान में दे दी।

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स्कूल के लिए जमीन देकर राजकिशोर गोसाई ने त्याग और समाज को शिक्षित बनाने के लिए जो पहल की है यह अनूठी है। इससे समाज को प्रेरणा लेने की जरूरत है।
-डॉ. अमरेंद्र पाठक, बीईओ, डुमरा सीतामढ़ी

Rohit Kumar

Founder- livebiharnews.in & Blogger- hinglishmehelp.com | STUDENT

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