बिहार की बेटी ने एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में लहराया परचम, …जानिए

पहले मजदूरी पर निर्भर और अब छोटी सी दुकान। दुकान से कमाई इतनी कि दो समय भोजन भी मिल पाना मुश्किल। ऊपर से समाज की बंदिश, बेटी को कबड्डी कोर्ट में भेजना चलनी से पानी छानने जैसा। हालांकि इसकी परवाह इलियास और मां फरिदा खातून ने नहीं की। दोनों ने बेटी को कोर्ट पर भेजने का फैसला किया तो कदम पीछे नहीं हटाए।

आज बेटी पर पूरे बिहार को गर्व है। बिहार के पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में दरियापुर निवासी शमा परवीन ईरान में संपन्न एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में भारतीय महिला टीम को खिताब दिला सबकी आंखों का तारा बन चुकी है।

पिता की छोटी सी परचून की दुकान की कमाई से भारतीय टीम तक सफर तय करने वाली शमा सबसे पहले अपने घर की हालत सुधारना चाहती है। हालांकि इसके लिए उसे नौकरी की दरकार है।

समाज ने किया विरोध
शमा को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाने में उसके अभिभावकों को पापड़ बेलने पड़े हैं। बाढ़ में एक निजी कंपनी में मजदूरी कर शमा समेत चार बेटियों और एक बेटे की परवरिश करना ही मुश्किल हो रहा था। ऐसे में बड़ी बहन हिना के साथ सुल्ताना और शमा के कबड्डी के प्रति लगाव से इलियास और फरिंदा के हाथ-पांव फूलने लगे।

भविष्य देख दोनों ने बेटियों को कोर्ट पर भेजने का फैसला किया। इतना ही नहीं स्वयं कोर्ट का निर्माण किया और प्रशिक्षक की भूमिका निभाई। समाज का विरोध शुरू हुआ तो साथी मैतून निशा, सोनी कुमारी, बबीता देवी के साथ घर-घर जाकर फरिंदा ने गुहार लगाई और बेटियों को कोर्ट पर भेजने देने का आग्रह किया।

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आखिरकार बदलाव की बयार दिखी और अब कोर्ट पर तीन नहीं, सैकड़ों बच्चियों की आवाज कबड्डी-कबड्डी से गुंजायमान रहती है।

जो काम हिना नहीं कर सकी, वह शमा करेगी
अपने संघर्ष की दास्तां सुनाते हुए इलियास बताते हैं कि 2012 में कंपनी बंद होने के बाद उनकी मजदूरी भी छिन गई। जो पैसे मिले, उससे बड़ी बेटी हिना की शादी कर दी। हिना के असमय कबड्डी छोडऩे का अफसोस है।

अब घर में ही छोटी सी दुकान कर परिवार का जीवन-यापन कर रहा हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि जो काम हिना नहीं कर सकी, उसे शमा करेगी। मैं चाहूंगा कि शमा को इनाम के रूप में नौकरी मिले।

सौ रुपये ने बदली मेरी तकदीर
सोमवार को देर शाम ईरान से नई दिल्ली लौटी शमा परवीन ने अपनी उपलब्धियों का श्रेय अभिभावकों और बिहार कबड्डी संघ को दिया। शमा ने बताया कि 2007 में सब जूनियर अंतर जिला कबड्डी खेलने भोजपुर गई थी।

वहां मेरे प्रदर्शन से खुश होकर संघ के सचिव कुमार विजय ने इनाम में सौ रुपये दिए थे। मेरे लिए यह इनाम एक लाख के बराबर था। इसके बाद खूब मेहनत की। सब जूनियर, जूनियर, सीनियर स्टेट होते हुए नेशनल तक बेहतर प्रदर्शन कर भारतीय टीम में खेली।

कहा- बिहार कबड्डी संघ के सचिव ने
शमा परवीन ने बाढ़ के छोटे से इलाके दरियापुर से निकलकर एशियन कबड्डी में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश को खिताब से नवाजा। यह बिहार के लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री से आग्रह करूंगा कि शमा की खेल कोटे में एएसआइ में सीधी नियुक्ति की जाए, जिससे वह आर्थिक तंगहाली से निकल अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सके।
-कुमार विजय, बिहार कबड्डी संघ के सचिव

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उपलब्धियां–
-8 बार राष्ट्रीय टूर्नामेंट में बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुकी है शमा परवीन
-6 बार सीनियर, जूनियर और 2 बार सब जूनियर नेशनल खेली
-3 बार जोनल टूर्नामेंट में बिहार को पदक दिलाने में कामयाब हुई
-3 बार भारतीय टीम के कैंप (2016 गांधीनगर, 2014-2015 साई सेंटर) में शामिल हुई
-1 बार भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया, देश को स्वर्ण पदक दिलाया

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