17 साल बाद खत्म हुआ बिहार क्रिकेट का ‘वनवास’, …जानिए

बिहार के क्रिकेट प्रेमियों और खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को निर्देश दिए हैं कि बिहार की स्टेट टीम को रणजी ट्रॉफी समेत अन्य टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि बिहार 70 के दशक से क्रिकेट खेल रहा है। पहले खेलों और फिर बाद में विवाद सुलझाएंगे। कोर्ट ने ये भी साफ किया कि ये अंतरिम आदेश दाखिल याचिकाओं पर नहीं बल्कि क्रिकेट के लिए दिए गए हैं।

17 साल पहले बिहार और झारखंड के बंटवारे के बाद से बिहार में क्रिकेट बंद है। बीसीसीआई ने झारखंड में इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए उसे खेलने की इजजात दे दी लेकिन बिहार पर रोक लगा दी थी।

बीसीसीआई द्वारा बिहार क्रिकेट संघ पर पाबंदी का एक बड़ा कारण क्रिकेट संघों का विवाद भी रहा। लालू यादव और कीर्ति आजाद के नेतृत्व वाला बिहार क्रिकेट एसोसिएशन और एसोसिएशन ऑफ बिहार क्रिकेट की आपसी विवाद के कारण मामला कोर्ट में चला गया।

अभी तक बिहार के बच्चे झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन से ही क्रिकेट खेलते थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब बिहार क्रिकेट टीम रणजी, देवधर और दिलीप ट्रॉफी खेल सकेगी।

बिहार क्रिकेट प्लेयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्यूजंय तिवारी ने कहा कि कोर्ट के फैसले से बिहार क्रिकेट का बनवास समाप्त हो गया है। इससे बड़ी खुशी क्रिकेट जगत के लिए नहीं हो सकती है। हमलोगों ने इसके लिए लंबा संघर्ष किया है।

पढ़े :   जब विदेशी सांसद ने गाया भोजपुरी गाना, ...देखें वीडियो

Leave a Reply

error: Content is protected !!